सामाजिक कार्यकर्ता जीतमल बांसरे ने मुख्यमंत्री से कदम्ब कुंज को विकसित पर्यटन एवं धार्मिक स्थल घोषित करने की मांग की

महूइब्राहिमपुर (करौली)। करौली जिले की हिंडौन तहसील में महवा-हिंडौन मार्ग पर स्थित करई गांव का ऐतिहासिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक धरोहर कदम्ब कुंज आज भी अपनी अनुपम छटा से लोगों को आकर्षित कर रहा है। शांत वातावरण, सैकड़ों वर्ष पुराने विशालकाय कदम्ब वृक्षों की गोलाकार परिधि और बीचों-बीच स्थित कुंड इस स्थल को “मिनी वृंदावन” जैसा आभास कराते हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यह स्थल भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा रहा है, इसलिए यहां कदम्ब वृक्ष की पूजा को श्रीकृष्ण की साक्षात पूजा माना जाता है।

साढ़े चार बीघा क्षेत्र में फैले कदम्ब कुंज में चारों दिशाओं में चार विशाल वृक्ष द्वारपाल की तरह खड़े हैं और चार प्रवेश द्वार इसकी विशेष पहचान हैं। सावन और कार्तिक मास में यहां महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जो परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वर्षा ऋतु में सरोवर जल से भर जाता है, जिससे पर्यावरण संतुलन भी बना रहता है।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी यह स्थल मिसाल है। वर्ष 2014 में “कदम बढ़ाओ, कदम्ब लगाओ” अभियान के तहत 131 कदम्ब पौधों का रोपण किया गया, जो आज छोटे वृक्ष बनकर विकसित हो रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता जीतमल बांसरे ने मुख्यमंत्री से कदम्ब कुंज को विकसित पर्यटन एवं धार्मिक स्थल घोषित करने की मांग की है। उन्होंने यहां सुलभ शौचालय, हाईमास्ट लाइट, अधूरा परिक्रमा मार्ग पूर्ण कराने, कदम्ब कुंड को आदर्श सरोवर के रूप में विकसित करने, सड़क मार्ग से जोड़ने, बिजली-पानी व स्वच्छता की समुचित व्यवस्था तथा पॉलीथीन व नशा मुक्त क्षेत्र घोषित करने की मांग उठाई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार ध्यान दे तो कदम्ब कुंज धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता

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