हिंडौन सिटी (करौली)। शहर के बयान मार्ग स्थित कस्टोडियन (शत्रु संपत्ति) भूमि पर अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पट्टे जारी किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पाठक ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने के साथ दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूमि भारत सरकार के अधीन कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया (CEPI) के नियंत्रण में आती है। ‘Enemy Property Act, 1968’ तथा वर्ष 2017 में हुए संशोधन के अनुसार शत्रु संपत्ति पर किसी भी भारतीय नागरिक या निजी व्यक्ति का कोई स्वामित्व अधिकार नहीं होता और न ही इस प्रकार की संपत्ति का हस्तांतरण, विक्रय, पट्टा या अन्य प्रकार का आवंटन वैध माना जाता है। कानून के तहत ऐसी संपत्तियां केंद्र सरकार के नियंत्रण में रहती हैं और उनका प्रबंधन कस्टोडियन द्वारा किया जाता है।
इसके बावजूद आरोप है कि भूमाफियाओं ने कथित रूप से जाली दस्तावेज तैयार कर उक्त भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया तथा राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर पट्टे जारी करा लिए। ज्ञापन में यह भी आशंका जताई गई है कि बिना विधिक अनुमति के सरकारी संपत्ति का उपयोग किया जा रहा है, जो कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। इस पूरे घटनाक्रम में संबंधित विभागों की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई गई है।
अशोक पाठक ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जारी किए गए सभी संदिग्ध पट्टों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए, मामले की जांच किसी सक्षम एजेंसी या उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए तथा फर्जी दस्तावेज तैयार करने और अवैध लाभ उठाने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकारी भूमि की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की भी आवश्यकता जताई गई है।
उन्होंने कहा कि सरकारी और कस्टोडियन संपत्तियां सार्वजनिक हित की धरोहर हैं, जिनकी सुरक्षा और संरक्षण राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इससे कानून व्यवस्था और जनहित दोनों प्रभावित हो सकते हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और नागरिक निष्पक्ष कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
